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नीला ड्रम हत्याकांड: 163 पन्नों के फैसले में कोर्ट की सख्त टिप्पणियां

by on | 2026-10-16 13:01:54

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नीला ड्रम हत्याकांड: 163 पन्नों के फैसले में कोर्ट की सख्त टिप्पणियां

मेरठ | बेबाक24 न्यूज़

मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने 163 पन्नों के फैसले में अपराध की क्रूरता, सामाजिक विश्वास को पहुंचे आघात और दोषियों के आचरण पर गंभीर टिप्पणियां की हैं। सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी ठहराते हुए अदालत ने इसे दुर्लभतम अपराध की श्रेणी में माना। फैसले में कहा गया कि मामले में नरमी बरतने लायक कोई परिस्थिति नजर नहीं आती।

सामाजिक विश्वास को पहुंचा गहरा आघात

फैसले के अनुसार, मुस्कान ने अपने विवाहेतर संबंध के साथी साहिल के साथ मिलकर पति की योजनाबद्ध तरीके से हत्या की। अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह अपने ही जीवनसाथी की बेरहमी से हत्या करना केवल एक व्यक्ति के भरोसे को तोड़ना नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास को भी गंभीर नुकसान पहुंचाना है।

न्यायालय ने कहा कि विदेश से परिवार के साथ सुखी जीवन बिताने की उम्मीद लेकर लौटे सौरभ की हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई। शव को ड्रम में रखकर सीमेंट से छिपाने की घटना को भी अदालत ने गंभीर और समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला बताया।

घटनास्थल के साक्ष्यों का किया उल्लेख

फैसले में घटनास्थल की दीवारों और छतों पर मिले खून के निशानों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ये घटना की क्रूरता को दर्शाते हैं। अदालत ने दोषियों के सुनवाई के दौरान के व्यवहार पर भी टिप्पणी की। फैसले के मुताबिक, दोनों के आचरण में पश्चाताप या अपराध-बोध के संकेत नहीं दिखे।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि साहिल ने अपने पिता और मुस्कान ने अपनी पहली संतान से मिलने में रुचि नहीं दिखाई। न्यायालय ने इन परिस्थितियों को दोषियों के आचरण के आकलन में शामिल किया।

पुराने न्यायिक फैसलों का दिया हवाला

163 पन्नों के फैसले में अदालत ने कई पुराने न्यायिक निर्णयों का उल्लेख किया। इनमें मच्छी सिंह बनाम पंजाब राज्य का फैसला भी शामिल है, जिसमें दुर्लभतम मामलों में मृत्युदंड के सिद्धांत पर चर्चा की गई थी।

इसके अलावा अदालत ने साक्ष्यों के मूल्यांकन से जुड़े फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मामूली विरोधाभासों के आधार पर पूरे अभियोजन पक्ष के मामले को खारिज नहीं किया जा सकता। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों वाले मामलों में आरोपियों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन जरूरी है।

नरमी की गुंजाइश नहीं: अदालत

फैसले में अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता, अपराध के तरीके और दोषियों के आचरण को देखते हुए नरमी बरतने का आधार नहीं है। न्यायालय ने उनके सुधार और समाज में पुनर्वास की संभावना पर भी प्रतिकूल टिप्पणी की।

बेबाक24 टेक

नीला ड्रम हत्याकांड के 163 पन्नों के फैसले में अदालत ने अपराध की क्रूरता, सामाजिक विश्वास को पहुंचे नुकसान और उपलब्ध साक्ष्यों पर विस्तार से टिप्पणी की। फैसले में पुराने न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए इसे दुर्लभतम मामलों की कसौटी पर परखा गया।



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