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पश्चिम एशिया संकट से बासमती निर्यात पर मार, 3 लाख टन चावल अटका

by on | 2026-10-16 12:55:54

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पश्चिम एशिया संकट से बासमती निर्यात पर मार, 3 लाख टन चावल अटका

चंडीगढ़ | बेबाक24 न्यूज़

पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद होने से पंजाब के बासमती चावल निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले साल का स्टॉक अभी पूरी तरह निर्यात नहीं हुआ है, जबकि नई फसल का करीब 15 लाख मीट्रिक टन बासमती निर्यात के लिए तैयार है। समुद्री भाड़ा 500 डॉलर से बढ़कर 3,000 डॉलर तक पहुंच गया है। इससे निर्यात में लगने वाला समय 7 दिन से बढ़कर करीब 1 महीने हो गया है।

पुराना स्टॉक अटका, नई फसल तैयार

पंजाब में हर साल करीब 30 लाख मीट्रिक टन बासमती का उत्पादन होता है। इसमें से लगभग 15 लाख टन बासमती निर्यात के लिए तैयार होता है। पंजाब के बासमती उत्पादन का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा दूसरे देशों में भेजा जाता है।

फिलहाल पंजाब की मिलों में पिछले साल का करीब 2 लाख टन चावल पड़ा है, जबकि 1 लाख टन चावल का निर्यात अटका हुआ है। इस तरह कुल 3 लाख टन चावल की निकासी प्रभावित है। नई फसल मंडियों में पहुंचने के साथ निर्यातकों के सामने पुराने स्टॉक को निकालने और नए चावल के भंडारण की चुनौती खड़ी हो गई है।

समुद्री भाड़ा 6 गुना बढ़ा

पंजाब बासमती मिलर्स एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के वित्त सचिव नरेश गोयल के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद होने से समुद्री भाड़ा 500 डॉलर से बढ़कर 3,000 डॉलर तक पहुंच गया है। निर्यात में देरी के कारण भुगतान भी समय पर नहीं मिल रहा है।

गोयल ने बताया कि फरवरी से अब तक करीब 60 करोड़ रुपये का निर्यात प्रभावित हुआ है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि मार्ग जल्द नहीं खुला तो निर्यातकों को आगे भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ईरान समेत कई देशों में जाता है बासमती

पंजाब से बड़ी मात्रा में बासमती चावल ईरान भेजा जाता है। इसके अलावा इराक, संयुक्त अरब अमीरात और यमन सहित मध्य पूर्व के कई देशों में भी इसका निर्यात होता है। यूरोपीय संघ, तुर्किये और ब्रिटेन भी पंजाब के बासमती के प्रमुख बाजार हैं।

एसोसिएशन के प्रधान बाल कृष्ण बाली ने बताया कि पंजाब के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी करीब 7 लाख टन बासमती आता है। इस तरह कुल लगभग 22 लाख टन बासमती के निर्यात की चुनौती है। उनके अनुसार, पूरे देश से करीब 48,000 करोड़ रुपये का बासमती चावल निर्यात होता है, जिसमें पंजाब की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है।

बेबाक24 टेक

पश्चिम एशिया संकट ने पंजाब के बासमती कारोबार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर पुराने चावल का निर्यात अटका है, वहीं दूसरी ओर नई फसल तैयार है। समुद्री भाड़े में बढ़ोतरी और निर्यात में देरी से लागत बढ़ रही है। कारोबारियों को उम्मीद है कि होर्मुज मार्ग खुलने से निर्यात व्यवस्था सामान्य हो सकेगी।



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