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लक्ष्मण के दौर में वैभव को हर मैच में मौका, गंभीर के समय सिर्फ 3 बार क्यों?

by on | 2026-10-16 12:55:00

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लक्ष्मण के दौर में वैभव को हर मैच में मौका, गंभीर के समय सिर्फ 3 बार क्यों?

क्रिकेट डेस्क | बेबाक24 न्यूज़

भारतीय क्रिकेट के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर टीम चयन पर बहस तेज हो गई है। 15 साल के वैभव को वीवीएस लक्ष्मण के मार्गदर्शन में सभी 5 मैचों में खेलने का मौका मिला, जबकि गौतम गंभीर के मुख्य कोच रहते हुए 14 मैचों में उन्हें सिर्फ 3 बार अंतिम एकादश में जगह मिली। भारत-वेस्टइंडीज टी20 श्रृंखला में लगातार 4 मैचों तक बाहर बैठने के बाद उनके अवसरों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

आंकड़ों में कितना अंतर?

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लक्ष्मण के मार्गदर्शन में वैभव ने जिम्बाब्वे दौरे और एशियाई खेलों के दौरान कुल 5 मुकाबले खेले। इसके उलट, गंभीर के कार्यकाल में टीम में चुने जाने के बावजूद वह 14 मैचों में से केवल 3 में मैदान पर उतरे।

इस तरह लक्ष्मण के कार्यकाल में उन्हें 100% मैचों में खेलने का अवसर मिला, जबकि गंभीर के कार्यकाल में यह आंकड़ा करीब 21% रहा। हालांकि, ये आंकड़े अपने आप में दोनों कोचों की पसंद या रणनीति का पूरा प्रमाण नहीं हैं।

सीनियर ओपनरों से प्रतिस्पर्धा

वैभव को सीमित मौके मिलने की एक संभावित वजह भारतीय टीम का मौजूदा ओपनिंग संयोजन है। संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ियों के रहते शीर्ष क्रम में जगह बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

लक्ष्मण के मार्गदर्शन में युवा खिलाड़ियों को अवसर मिलने वाली परिस्थितियां अलग थीं। वहीं, गंभीर के कार्यकाल में टीम संयोजन, स्थापित खिलाड़ियों को निरंतर मौके देने और सीरीज की जरूरतों को ध्यान में रखकर चयन किए जाने की संभावना है।

15 साल की उम्र भी एक पहलू

वैभव अभी कम उम्र के हैं। ऐसे में टीम प्रबंधन उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दबाव से धीरे-धीरे परिचित कराने की रणनीति अपना सकता है। हालांकि, यह सीमित अवसरों की संभावित वजह है; उपलब्ध जानकारी से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं होती।

मुख्य टीम के साथ रहने से उन्हें वरिष्ठ खिलाड़ियों से सीखने और टीम की रणनीति समझने का अवसर मिलता है, लेकिन मैच में खेलने का अनुभव भी उनके विकास के लिए अहम है।

शानदार स्ट्राइक रेट के बावजूद इंतजार

लेख में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वैभव ने भारत के लिए 8 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 246 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 186 से अधिक रहा है। उनका आक्रामक अंदाज उन्हें चर्चा में रखता है, लेकिन किसी बल्लेबाज का आकलन केवल स्ट्राइक रेट से नहीं किया जा सकता। निरंतरता, परिस्थितियों के मुताबिक बल्लेबाजी और अलग-अलग गेंदबाजों के खिलाफ प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण हैं।

वैभव के बचपन के कोच मनीष ओझा ने उन्हें नियमित अवसर नहीं मिलने पर टीम प्रबंधन की आलोचना की थी। इससे चयन को लेकर बहस और तेज हुई है।

आगे क्या होगा?

टीम प्रबंधन के सामने चुनौती वैभव जैसे प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी को मौका देने और मौजूदा बल्लेबाजी संयोजन में संतुलन बनाए रखने की है। नियमित अवसर मिलने से उनकी अंतरराष्ट्रीय क्षमता का बेहतर आकलन हो सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय टीम की जरूरतों और रणनीति पर निर्भर करेगा।

बेबाक24 टेक: लक्ष्मण और गंभीर के कार्यकाल में वैभव सूर्यवंशी को मिले अवसरों के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई देता है। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर चयन नीति या कोचों की मंशा पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। असली सवाल यह है कि टीम प्रबंधन इस युवा बल्लेबाज को आगे किस भूमिका में और कब नियमित अवसर देता है।



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