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पूर्व सांसद अतुल राय की बढ़ी सक्रियता: मऊ में राजनीतिक हलचल तेज, काफिले से बसपा का झंडा 'लापता'

by admin@gmail.com on | 2025-11-30 22:48:15

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पूर्व सांसद अतुल राय की बढ़ी सक्रियता: मऊ में राजनीतिक हलचल तेज, काफिले से बसपा का झंडा 'लापता'


घोसी (मऊ)। घोसी लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद माफिया रहे मुख्तार अंसारी के खास अतुल राय के जेल से रिहाई के बाद उनकी लगातार जनसंपर्क यात्रा जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। पूरे जिले में उनके काफिले के साथ हो रहे भ्रमण के दौरान एक विशिष्ट बात स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान विशेष रूप से खींच रही है— अतुल राय के वाहन पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का झंडा नदारद है।

राय ने 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के टिकट पर घोसी से जीत दर्ज की थी, हालांकि चुनाव के दौरान ही उन्हें जेल जाना पड़ा और उनका पूरा कार्यकाल सलाखों के पीछे ही बीता। आश्चर्यजनक रूप से, पूर्व सांसद ने अभी तक बसपा से अलग होने या किसी अन्य दल में शामिल होने का कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया है।

 झंडा नदारद होने पर कयासों का बाजार गर्म

झंडे की अनुपस्थिति को लेकर स्थानीय राजनीतिक गलियारे में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। स्थिति को और दिलचस्प बनाते हुए, उनके जनसंपर्क अभियान में बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राज विजय और वर्तमान मंडल प्रभारी संतोष राजभर जैसे पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारी लगातार उनके साथ मौजूद हैं। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद झंडे का गायब होना लोगों के बीच चर्चा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम को अतुल राय के राजनीतिक दिशा बदलने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। झंडे की गैरमौजूदगी उनके आगामी राजनीतिक फैसलों को लेकर अटकलों के बाजार को गर्म कर रही है।

 'आका' के आशीर्वाद से सपा में जाने की चर्चा

अतुल राय के काफिले से बसपा का झंडा गायब होने के बाद से यह अटकलें तेज हो गई हैं कि वह जल्द ही अपनी पार्टी बदल सकते हैं। सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें आ रही हैं कि पूर्व सांसद अपने राजनीतिक आका अंसारी बंधुओं के आशीर्वाद से समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम सकते हैं।

सूत्र बताते हैं कि अतुल राय को 2019 में बसपा का टिकट भी अंसारी बंधुओं के आशीर्वाद से ही मिला था। ज्ञात हो कि अंसारी बंधुओं से उनके पुराने राजनीतिक रिश्ते रहे हैं, हालांकि एक समय मुख्तार अंसारी से उनकी अनबन की खबरें भी सामने आई थीं, जिन्हें मुख्तार अंसारी की कथित काली कमाई को बचाने के प्रयास के रूप में देखा गया था।

अब जेल से बाहर आने के बाद, राय का सघन जनसंपर्क अभियान स्पष्ट संकेत दे रहा है कि वह आगामी विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। घोसी की जनता और राजनीतिक विशेषज्ञ अब उनके अगले बड़े राजनीतिक कदम और औपचारिक ऐलान पर तरह तरह के कयास लगा रहे हैं।



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